वायुमंडल | Vayumandal notes hindi PDF | Vayumandal notes

वायुमंडल | Vayumandal notes hindi PDF | Vayumandal notes


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वायुमंडल

वायुमंडल क्या है ?

● गैसों के मिश्रण के कारण पृथ्वी के चारों ओर पाए जाने वाले आवरण को वायुमण्डल कहते हैं।
वायुमण्डल के द्वारा लगाए जाने वाले दबाव को वायुदाब कहते हैं।
● यह वायुदाब समुद्रतल पर सर्वाधिक पाया जाता है
● स्थलमंडल और जलमंडल की भांति यह भी हमारे पृथ्वी का अभिन्न अंग है।
● इसमें उपस्थित विभिन्न गैस धूलकण जलवाष्प तापमान व दिन प्रतिदिन की घटने वाली मौसमी घटनाएं इसके उपस्थिति का एहसास कराती है।
● इस प्रकार वायुमंडल पृथ्वी को चारो ओर से घेरे हुए है और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारन यह इससे अलग नही हो सकता

वायुमंडल की क्या विशेषताये है ?        

वायुमंडल की विशेषतायें:-

वायु रंगहीन , गंधहीन ,व स्वादहीन है।
वायुमंडल पृथ्वी तल पर सामान रूप से फैला हुआ है।
वायुमंडल में घटने वाली समस्त वायमंडलीय घटनाओं एवम प्रक्रमों का मूल कारण सूर्य से विकीर्ण होने वाली ऊर्जा है।
● वायु की गतिशीलता ,नमनशीलता  तथा सम्पीड़नशीलता  इसके मुख्य गुण है।
● वायु के क्षैतिज सञ्चालन होने पर इसकी गतिशीलता की अनुभूति होती है।
● इसमें सम्पीड़नशीलता के गुण के कारण ही धरातल से ऊंचाई में वृद्धि के साथ ही इसके घनत्व में कमी होती जाती है।
वायुमंडल सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से पृथ्वी की रक्षा करता है तथा पार्थिव विकिरणों को अवशोषित कर हरित गृह प्रभाव द्वारा पृथ्वी तल के तापमान को निचा नही होने देती है। जिसके परिणामस्वरूप वायमंडलीय तापमान जीवधारियों के लिए उपयुक्त बना रहता है।
वायुमंडल में उपस्थित जलवाष्प विभिन्न प्रकार की मौसमी घटनाओं जैसे मेघ पवन तूफान आदि को जन्म देती है। 
● मानसून एवम ऋतु परिवर्तन भी वायमंडलीय घटनाओं के ही परिणाम है।

वायुमंडल का संगठन

वायुमण्डल में अनेक तत्व पाए जाते हैं:-

वायुमंडल का गठन अनेक प्रकार के गैसों, जल वाष्प, धुएं के कणों आदि से हुआ है।

धूलकण:-

● इनको एरोसोल्स भी कहते हैं।
● इन धूल कणों में ज्वालामुखी से निकलने वाले कण,वनस्पति के पराग कण तथा वायुमण्डल के अन्य तत्वों से निकलने वाले कण पाए जाते हैं।
● इन धूलकणों द्वारा जलबून्दों का निर्माण किया जाता है इसलिए इन्हें आर्द्रताग्राही नाभिक कहते है।

जलवाष्प:-

● यह प्राथमिक हरित ग्रह गैस है।
● इसकी अधिकतम मात्रा 2 से 4 प्रतिशत पाई जाती है।
● लगभग 90 प्रतिशत जलवाष्प 5 किलोमीटर की ऊंचाई तक पाई जाती है।
● यह वायुमंडल की सर्वाधिक परिवर्तनशील तत्व है।
● आद्रता तथा तापमान के अनुसार जलवाष्प की मात्रा में परिवर्तन होता रहता है।
● धरातल के निकट इसकी मात्रा 0-5 % तक पाई जाती है।वायु को जलवाष्प की प्राप्ति झीलों ,सागरों ,नदियों तथा वनस्पति के भीतर के वाष्पीकरण क्रिया द्वारा होती है।
● तापमान वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा को सर्वाधिक प्रभावित करता है। भूमध्य रेखा पर अधिक वर्षा व मेघों की उपस्थिति के कारण जलवाष्प की मात्रा अधिक होती है। वहीँ मरुस्थलीय क्षेत्रो में उच्च तापमान के कारण न्यूनतम जलवाष्प पाई जाती है।
जलवाष्प वायुमंडल के निचली परत में पाई जाती है। ऊंचाई बढ़ने के साथ साथ जलवाष्प की मात्रा में कमीं होती जाती है।
जलवाष्प वायुमंडल का बहुत महत्वपूर्ण तत्व है। यह आंशिक तौर पर सौर विकिरण तथा पार्थिव विकिरण को अवशोषित कर भूतल के तापमान को सम रखने में सहायक होती है।
● यह वायुमंडल में घनीभूत आद्रता के विविध रूपों जैसे बादल ,वर्षा ,कुहरा ,पाला ,हिम आदि का प्राप्त श्रोत है।
जलवाष्प ही पृथ्वी के विभिन्न भागों में चलने वाली चक्रवातों प्रतिचक्रवातों तूफानों तड़ित झंझावात आदि को शक्ति प्रदान करता है।

नोट:- भूमध्य रेखा से ध्रुवों की तरफ जाने पर  जलवाष्प में कमी होती है।

गैसे:-

वायुमंडल विभिन्न प्रकार के गैसों का मिश्रण है जिसमे मुख्यतः 9 प्रकार के गैस पाई जाती है :-
  ◆ ऑक्सीजन
  ◆ नाइट्रोजन
  ◆ आर्गन
  ◆ कार्बन डाइऑक्साइड
  ◆ हाइड्रोजन 
  ◆ निऑन
  ◆ हीलियम
  ◆ क्रिप्टॉन
  ◆ ओजोन।
● इन सभी गैसों में नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन प्रमुख है।
● भारी गैसें वायुमंडल के निचली परतों में तथा हलकी गैसें वायुमंडल के ऊपरी परतों में स्थित होता है।

नाइट्रोजन:-

नाइट्रोजन वायुमण्डल में सर्वाधिक 78.01प्रतिशत पाई जाती है।
● इस गैस की खोज रदरफोर्ड द्वारा की गई।
● यह गैस भूमि के लिए उपजाऊ होती है तथा यह लेग्यूमिनस कुल के राइजोबियम नामक पौधों की जड़ों में पाई जाती है।
● यह प्रोटीन निर्माण में सहायक होती है।

ओक्सीजन :-

वायुमण्डल में इसकी मात्रा 20.98 प्रतिशत पाई जाती है।
● इस गैसकी खोज जोसेफ प्रिस्टली द्वारा की गई।
● इस गैस का निर्माण पौधा तथा काइटोप्लेंक्टन द्वारा प्रकाश संश्लेषण के क्रिया में किया जाता है।
● 60 किलोमीटर की ऊंचाई तक ऑक्सीजन आण्विक अवस्था में जबकि इससे ऊपर विघटित अवस्था में पाई जाती है।
● यह श्वसन क्रिया में काम आती है इसलिए इसे प्राणदायिनी गैस भी कहते हैं।

ऑर्गन :-

● इसकी मात्रा 0.93 प्रतिशत पाई जाती है।
● यह एक अक्रिय लेकिन स्थायी गैस है।

कार्बन डाई ऑक्साइड:-

● यह सर्वाधिक प्रभावित हरित ग्रह गैस है।
● वायुमण्डल में इसकी मात्रा 0.03 प्रतिशत पाई जाती है।
● पौधे इस गैस द्वारा भोजन निर्माण करते है। यह गैस आग बुझाने में काम आती है।

वायुमंडल की संरचना

वायुमण्डल की प्रमुख परतें :-

क्षोभमण्डल (ट्रोपोस्फियर):-

क्षोभमण्डल परत की ऊंचाई 8 से 18 किलोमीटर तक पाई जाती है।
● इस परत में मौसमी तथा जैविक क्रियाएं होने के कारण इसे जैवमण्डल तथा मौसममण्डल तथा परिवर्तन मण्डल कहते हैं।
● इस परत की खोज डी बोट द्वारा की गई ।
क्षोभमण्डल में ऊंचाई की तरफ जाने पर तापमान घटते हुए अन्त में -40डिग्री से -80डिग्री सेल्सियस हो जाता है।
क्षोभमण्डल परत में तापमान की पतन दर 1000 मीटर पर 6.5 डिग्री सेल्सियस तथा 165 मीटर पर एक डिग्री सेल्सियस होती है।
जलवाष्प मुख्य रूप से इसी परत पर पाई जाती है।
● यह वायुमंडल की सबसे निचली सक्रिय तथा सघन परत है।
● इसमें वायुमंडल के कुल आणविक भार का 75 % केंद्रित है।
● इस परत में आद्रता जलकण धूलकण वायु धुन्ध तथा सभी प्रकार की वायुमंडलीय विक्षोभ व गतियां संपन्न होती है।

नोट:- क्षोभमण्डल तथा समताप मण्डल के मध्य एक संक्रमित परत पाई जाती है जिसे ट्रोपोपोज कहते हैं। इस परत के बारे में सर्वप्रथम नेपियर शॉ द्वारा बताया गया ।

समताप मण्डल (स्ट्रेट्रोस्फियर):-

समताप मण्डल परत की ऊंचाई धरातल से 50 किलोमीटर है।
● इस परत में तापमान प्रतिलोमनता पायी जाती है। तथा समान तापमान होकर सम्पूर्ण परत में 0 डिग्री सेल्यिस पाया जाता है।
● इसमें समान तापमान का कारण ओजोन परत है जो कि 20 से 35 किलोमीटर के मध्य पाई जाती है।

नोट:-ओजोन परत की सर्वाधिक सघनता 23 किलोमीटर पर पाई जाती है। इस परत में समान तापमान के कारण मौसमी घटनाएं नहीं होती है। तथा वायुयान इसी परत में उड़ाए जाते हैं। समताप मण्डल में ओजोन परत द्वारा सूर्य से आने वाली पेराबेंगनी किरणों का अवशोषण कर लिया जाता है।
नोट :-समताप तथा मध्य मण्डल के बीच में स्ट्रेटोपोज नामक संक्रमित परत पाई जाती है।

मध्य मण्डल (मिजोस्फियर):-

मध्य मण्डल इसकी ऊचाई 80किलोमीटर होती है।
● इस परत में पृथ्वी का सबसे न्यूनतम तापमान -100डिग्री सेल्सियस पाया जाता है।
● इस परत के बाद में निरन्तर तापमान बढता रहता है।

नोट:- मध्यमण्डल तथा आयनमण्डल के बीच में एक संक्रमित परत पाई जाती है जिसे मैसोपोज/मिजोपोज कहते हैं।

आयनमण्डल(Ionosphere) :-

आयन मण्डल की ऊंचाई 400 किलोमीटर होती है।
आयन मण्डल से गुजरने के कारण उल्कापिण्ड चमकते हुए दिखाई देते हैं।
वायुमण्डल की इस पर से लघु,मध्यम,दीर्घ तरंगों को पुनः पृथ्वी पर भेजा जाता है।
आयनमण्डल के कारण ही पृथ्वी के दोनों ध्रुवोें पर एक विशेष प्रकाश उत्पन्न होता है। जिसे ध्रुवीय ज्योति कहते हैं।

बहिर्मण्डल(Exosphere) :-

आयनमण्डल के बाद सम्पूर्ण वायुमण्डल बर्हिमण्डल कहलाता है।
● इस परत का विशेष अध्यन lyman spitzer ने किया
● जिसकी ऊंचाई 3000 किलोमीटर तक है।
● इस परत में निरन्तर तापमान बढने के कारण इसे तापमण्डल या थर्मोस्फियर कहते हैं

सारांश

वायुमंडल हमारे पृथ्वी के चारो और खोल के रूप में पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारन पाया जाता है  इसमे गेंसे , धूलकण, जलवाष आदि पाई जाती है।
● इसमें गैस, धूलकण, जलवाष्प आदि पाई जाती है, जो मानव जगत, वनस्पति जगत, एवं जीव जगत सभी के लिए अति आवश्यक है।
वायुमंडल की संरचना विविध एवं  विस्मयकारी है।
● इसमें भिन्न तापक्रम मंडल जहां ऊंचाई के साथ साथ सामान्य ताप पतन दर से तापमान घटता जाता है।
समताप  मंडल में तापमान समान रहता है वर्षा, मेघ गर्जना, तड़ित झंझा, आंधी, तूफान सभी विस्मयकरी घटनाएं वायुमंडल में ही घटित होती है।
पराबैंगनी किरणों का अवशोषण रेडियो तरंगे ईथर का प्रयोग आदि सभी वायुमंडल की ही देन है।
● फसलों की उत्पत्ति, जीव जगत का प्रादुर्भाव, मानव जगत का अस्तित्व सभी वायुमंडल के कारण हैं।
भूगोल की समस्त अपरदन चक्र, विखंडन, अपक्षय, अनाच्छादन सभी वायुमंडल के कारण होती है।
● जल, पावक, समीर सभी  तत्व वायुमंडल के कारण ही है अतः वायुमंडल हमारे लिए अति महत्वपूर्ण है।
वायुमंडल की संरचना भिन्न तापक्रम मंडल, समताप मंडल, ओजोन मंडल, आयन मंडल, विषम मंडल, मध्य मंडल, ग्रह मंडल, ब्रह्म मंडल एवं चुंबकीय मंडल द्वारा होती हैं।

वायुमंडल का महत्व

● प्राणियों और पादपों के जीवनपोषण के लिए वायुमंडल का महत्व अत्यावश्यक है।
● पृथ्वीतल के अपक्षय पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ता है।
● नाना प्रकार की भौतिक और रासायनिक क्रियाएँ वायुमंडल की वायु के कारण ही संपन्न होती हैं।
वायुमंडल के अनेक दृश्य, जैसे इंद्रधनुष, बिजली का चमकना और कड़कना, उत्तर ध्रुवीय ज्योति, दक्षिण ध्रुवीय ज्योति, प्रभामंडल, किरीट, मरीचिका इत्यादि प्रकाश या विद्युत के कारण उत्पन्न होते हैं

अन्य जानकारी :-

वायुमंडल का घनत्व एक सा नहीं रहता।
● समुद्रतल पर वायु का दबाव 760 मिलीमीटर पारे के स्तंभ के दाब के बराबर होता है। ऊपर उठने से दबाव में कमी होती जाती है।
● ताप या स्थान के परिवर्तन से भी दबाव में अंतर आ जाता है।
● सूर्य की लघुतरंग विकिरण ऊर्जा से पृथ्वी गरम होती है। 
● पृथ्वी से दीर्घतरंग भौमिक ऊर्जा का विकिरण वायुमंडल में अवशोषित होता है। इससे वायुमंडल का ताप - 68 डिग्री सेल्सियस से 55 डिग्री सेल्सियस के बीच ही रहता है।
● 100 किमी के ऊपर पराबैंगनी प्रकाश से आक्सीजन अणु आयनों में परिणत हो जाते हैं और परमाणु इलेक्ट्रॉनों में। इसी से इस मंडल को आयनमंडल कहते हैं। 
● रात्रि में ये आयन या इलेक्ट्रॉन फिर परस्पर मिलकर अणु या परमाणु में परिणत हो जाते हैं जिससे रात्रि के प्रकाश के वर्णपट में हरी और लाल रेखाएँ दिखाई पड़ती हैं।

वायुमंडलीय दाब किसे कहते है?

● धरातल पर या सागर तल पर क्षेत्राफल की प्रति इकाई पर ऊपर स्थित वायुमंडल की समस्त परतों के पड़ने वाले भार को ही वायुमंडलीय दाब कहा जाता है। 
● इसे बैरोमीटर द्वारा मापा जाता है। 
● सागर तल पर वायु दाब अधिकतम होता है।
वायुमंडल में जल वाष्प की मात्रा बढ़ने पर वायुदाब में कमी आ जाती है।
● कम दबाव वाले क्षेत्रों में उन स्थानों के ऊपर वायुमंडलीय द्रव्यमान कम होता है, जबकि अधिक दबाव वाले क्षेत्रों में उन स्थानों के ऊपर अधिक वायुमंडलीय द्रव्यमान होता है। 
● इसी प्रकार, जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती जाती है उस स्तर के ऊपर वायुमंडलीय द्रव्यमान कम होता जाता है, इसलिए बढ़ती ऊंचाई के साथ दबाव घट जाता है।

          "शब्दावली"

● वायू मंडल : - वायु का मंडल वायुमंडल कहलाता है।
● भिन्न तापक्रम मंडल : - जिस मंडल में तापमान में भिन्नता पाई जाती है।
● समताप मंडल : - जिस मंडल में लगभग तापमान समान रहता है।
● ओजोन मंडल :-जिस मंडल में ओजोन गैस की प्रधानता होती है।
● आयन मंडल  - जिस मंडल में आयन गैस की प्रधानता होती है।
● बाह्य मंडल  : - जो मंडल हमारे परिवेश से बाहर का होता है

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