मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 12 से 18): UPSC और State PSC के लिए सर्वश्रेष्ठ नोट्स

 भारतीय राजव्यवस्था (GS Paper-II): मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) - भाग 1

मौलिक अधिकार: एक परिचय (Introduction)
  • संविधान का भाग: भाग III (अनुच्छेद 12 से 35 तक)।
  • संविधान का मैग्नाकार्टा: भारत के संविधान के भाग III को 'भारत का मैग्नाकार्टा' (Magna Carta of India) कहा जाता है।
  • स्रोत: यह अमेरिका के संविधान (Bill of Rights) से प्रेरित है।
  • प्रकृति: ये अधिकार न्यायोचित (Justiciable) हैं, यानी इनके उल्लंघन होने पर नागरिक सीधे सुप्रीम कोर्ट (अनुच्छेद 32) या हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) जा सकते हैं।
  • मूल बनाम वर्तमान: मूल संविधान में 7 मौलिक अधिकार थे, लेकिन 44वें संविधान संशोधन (1978) द्वारा 'संपत्ति के अधिकार' (अनुच्छेद 31) को हटाकर इसे अनुच्छेद 300A के तहत एक कानूनी अधिकार बना दिया गया। वर्तमान में कुल 6 मौलिक अधिकार हैं।

मौलिक अधिकारों का वर्गीकरण (Classification)
वर्तमान में प्राप्त 6 मौलिक अधिकार इस प्रकार हैं:
  1. समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18)
  2. स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 19-22)
  3. शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23-24)
  4. धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28)
  5. संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार (अनुच्छेद 29-30)
  6. संवैधानिक उपचारों का अधिकार (अनुच्छेद 32)

प्रारंभिक अनुच्छेद (अनुच्छेद 12 और 13)
  • अनुच्छेद 12 (राज्य की परिभाषा): इसमें 'राज्य' (State) शब्द को परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार केंद्र सरकार, संसद, राज्य सरकारें, विधानमंडल, और सभी स्थानीय प्राधिकरण (जैसे नगरपालिका, पंचायत) तथा वैधानिक संस्थाएं (LIC, ONGC, GAIL) 'राज्य' के अंतर्गत आती हैं।
  • अनुच्छेद 13 (न्यायिक पुनरावलोकन का आधार): इसमें कहा गया है कि मूल अधिकारों से असंगत या उन्हें कम करने वाले कानून शून्य (Void) माने जाएंगे। यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट को न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) की शक्ति देता है।

1. समानता का अधिकार (Right to Equality: अनुच्छेद 14 से 18)
अनुच्छेद 14: कानून के समक्ष समानता और कानून का समान संरक्षण
  • कानून के समक्ष समानता: यह ब्रिटिश मूल की नकारात्मक अवधारणा है, जिसका अर्थ है कि कानून के सामने सब बराबर हैं और किसी को विशेष अधिकार नहीं हैं।
  • कानून का समान संरक्षण: यह अमेरिकी संविधान से ली गई सकारात्मक अवधारणा है, जिसका अर्थ है कि समान परिस्थितियों में लोगों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए।
  • अपवाद: भारत के राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों को इसके तहत कुछ विशेषाधिकार प्राप्त हैं (अनुच्छेद 361)।
अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध
  • राज्य किसी भी नागरिक के साथ केवल इन 5 आधारों पर कोई भेदभाव नहीं करेगा।
  • अपवाद (सकारात्मक भेदभाव): राज्य महिलाओं, बच्चों, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों (OBC/EWS) के लिए विशेष प्रावधान (जैसे आरक्षण) कर सकता है।
अनुच्छेद 16: लोक नियोजन के मामलों में अवसर की समता
  • सरकारी नौकरियों में सभी नागरिकों को समान अवसर मिलेंगे।
  • महत्वपूर्ण तथ्य: इसी अनुच्छेद के तहत पिछड़े वर्गों (अनुच्छेद 16(4)) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS - 103वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 16(6)) को सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया गया है।
अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता का अंत (Abolition of Untouchability)
  • छुआछूत या अस्पृश्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है और इसका किसी भी रूप में आचरण कानूनी रूप से दंडनीय अपराध है।
अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत (Abolition of Titles)
  • राज्य, सेना या शिक्षा संबंधी सम्मान के अलावा और कोई उपाधि (जैसे- महाराजा, राय बहादुर) प्रदान नहीं करेगा।
  • नोट: भारत रत्न, पद्म विभूषण जैसे राष्ट्रीय पुरस्कारों को उपाधि नहीं माना जाता (बालाजी राघवन मामला, 1996), लेकिन विजेता इनका उपयोग अपने नाम के आगे या पीछे 'सरनेम' की तरह नहीं कर सकते।

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