भारत का उपराष्ट्रपति (अनुच्छेद 63 से 71): चुनाव और कार्य | UPSC Notes

 भारतीय राजव्यवस्था (GS Paper-II): भारत का उपराष्ट्रपति (The Vice-President of India)

उपराष्ट्रपति: एक परिचय (Introduction)
  • संवैधानिक क्रम: राष्ट्रपति के बाद उपराष्ट्रपति का पद देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद है।
  • स्रोत: भारत के उपराष्ट्रपति का पद अमेरिका के उपराष्ट्रपति के पद की तर्ज पर बनाया गया है।
  • संविधान का भाग व अनुच्छेद: इसका उल्लेख संविधान के भाग V के तहत अनुच्छेद 63 से 71 तक में किया गया है।

महत्वपूर्ण अनुच्छेद: योग्यता, चुनाव और पद से हटाना
  • अनुच्छेद 63: भारत का एक उपराष्ट्रपति होगा।
  • अनुच्छेद 66 (योग्यताएँ): उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए निम्नलिखित योग्यताएं आवश्यक हैं:
    1. वह भारत का नागरिक हो।
    2. न्यूनतम 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो।
    3. राज्यसभा का सदस्य चुने जाने के लिए योग्य हो (ध्यान दें: राष्ट्रपति के लिए लोकसभा सदस्य की योग्यता चाहिए होती है)।
    4. केंद्र, राज्य या स्थानीय सरकार के अधीन किसी लाभ के पद पर न हो।
अनुच्छेद 66(1): उपराष्ट्रपति का निर्वाचन (Election Process)
उपराष्ट्रपति का चुनाव भी अप्रत्यक्ष रूप से एक निर्वाचक मंडल (Electoral College) द्वारा होता है। लेकिन इसका निर्वाचक मंडल राष्ट्रपति से अलग होता है:
  • निर्वाचक मंडल में कौन शामिल होता है? संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के सभी सदस्य (निर्वाचित और मनोनीत दोनों) शामिल होते हैं।
  • कौन शामिल नहीं होता? (Strictly Verified Fact): राज्यों की विधानसभाओं (MLAs) के सदस्य उपराष्ट्रपति के चुनाव में वोट नहीं डालते। (राष्ट्रपति के चुनाव में वे वोट डालते हैं)।
  • चुनाव पद्धति: आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के अनुसार एकल संक्रमणीय मत (Single Transferable Vote) द्वारा गुप्त मतदान से।
अनुच्छेद 67(b): पद से हटाना (Removal Process)
  • उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए संविधान में महाभियोग (Impeachment) जैसी किसी औपचारिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती।
  • उन्हें हटाने का प्रस्ताव केवल राज्यसभा में ही शुरू किया जा सकता है।
  • प्रस्ताव को राज्यसभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत (Effective Majority) द्वारा पारित किया जाना चाहिए और लोकसभा की केवल सहमति (Simple Majority) आवश्यक है। इसके लिए भी 14 दिन का एडवांस नोटिस देना अनिवार्य है।

उपराष्ट्रपति के प्रमुख कार्य और शक्तियां (Functions & Powers)
संविधान के तहत उपराष्ट्रपति की दोहरी भूमिका होती है:
  1. राज्यसभा के पदेन सभापति के रूप में (Ex-officio Chairman - अनुच्छेद 64):
    • वह राज्यसभा का पीठासीन अधिकारी (Chairman) होता है। उसकी शक्तियां और कार्य लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) के समान होते हैं।
    • ध्यान देने योग्य तथ्य: उपराष्ट्रपति राज्यसभा का सदस्य नहीं होता है, इसलिए उन्हें सामान्य परिस्थिति में वोट देने का अधिकार नहीं होता। लेकिन मत बराबर होने (Tie) की स्थिति में वह निर्णायक मत (Casting Vote) दे सकते हैं।
  2. कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में (Acting President - अनुच्छेद 65):
    • राष्ट्रपति का पद मृत्यु, त्यागपत्र, निष्कासन (महाभियोग) या अन्य कारणों से अचानक खाली होने पर वह अधिकतम 6 महीने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में काम कर सकता है।
    • इस अवधि के दौरान उन्हें राष्ट्रपति वाले सभी वेतन, भत्ते और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं। जब वह कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में काम करते हैं, तो वे राज्यसभा के सभापति के रूप में काम नहीं करते (उस समय उपसभापति राज्यसभा संभालते हैं)

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