कच्छी घोड़ी किस प्रकार का नृत्य है? | Rajasthan GK MCQ

 

Q. कच्छी घोड़ी  है?

कच्छी घोड़ी किस प्रकार का नृत्य है? | Rajasthan GK MCQ



A. शास्त्रीय लोक नृत्य


B. धार्मिक लोक नृत्य


C. व्यवसायिक लोक नृत्य 


D. जनजातीय लोक नृत्य





उत्तर:  व्यवसायिक लोक नृत्य




व्याख्या :-  


कच्छी घोड़ी राजस्थान का एक अत्यंत प्रसिद्ध व्यावसायिक लोक नृत्य (Professional Folk Dance) है। यह मुख्य रूप से राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनू और चूरू) से उत्पन्न हुआ है। इस नृत्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नर्तक अपनी कमर पर लकड़ी, बांस और कागज की लुगदी से बनी नकली घोड़ी का ढांचा बांधकर प्रदर्शन करते हैं।


इस नृत्य से जुड़े मुख्य महत्वपूर्ण पहलू निम्नलिखित हैं:


1. प्रदर्शन का स्वरूप और शैली

वीर रस का नृत्य: यह एक उत्साह और वीरता से भरपूर नृत्य है। इसमें नर्तक हाथों में खुली तलवारें लेकर नकली लड़ाई (Mock Fight) और कलाबाज़ी का प्रदर्शन करते हैं।

फूलों के खिलने और मुरझाने का आभास: नृत्य के दौरान कलाकारों की लयबद्ध गतियों और आगे-पीछे कदम बढ़ाने के पैटर्न से ऐसा प्रतीत होता है जैसे कोई फूल खिल रहा हो और बंद हो रहा हो।

केवल पुरुषों द्वारा प्रदर्शन: पारम्परिक रूप से इस नृत्य को केवल पुरुष कलाकारों द्वारा ही किया जाता है।


2. संगीत और वाद्ययंत्र


कहानियों का वाचन: नृत्य के दौरान गायक शेखावाटी क्षेत्र के प्रसिद्ध बावरिया डाकुओं (जो रॉबिन हुड की तरह अमीरों को लूटकर गरीबों में बांटते थे) और स्थानीय वीरों की लोककथाएं गाकर सुनाते हैं।

प्रमुख वाद्ययंत्र: इस नृत्य में मुख्य रूप से ढोल, बांकिया, थाली और झांझ (झालर) जैसे वाद्ययंत्रों की तेज और जोशीली थाप का उपयोग किया जाता है।


3. सामाजिक और व्यावसायिक महत्व


जातीय जुड़ाव: राजस्थान में यह नृत्य मुख्य रूप से सरगड़ा, कुम्हार, ढोली, कामधोली, भांबी और बावरी समुदायों के लोगों द्वारा किया जाता है।

अवसर: पहले यह केवल मनोरंजन के लिए होता था, लेकिन वर्तमान में यह एक व्यावसायिक नृत्य बन चुका है, जिसका आयोजन शादियों में दूल्हे के पक्ष (बारात) के स्वागत, त्योहारों, सामाजिक उत्सवों और सांस्कृतिक मेलों में प्रमुखता से किया जाता है।


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