भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण भाग और संघ का राज्य क्षेत्र: UPSC Notes

 भारतीय राजव्यवस्था (GS Paper-II): भारतीय संविधान के भाग और संघ व उसका राज्य क्षेत्र

भारतीय संविधान के भाग (Parts of the Constitution)
मूल संविधान में 22 भाग थे, लेकिन संशोधनों के बाद वर्तमान में कुल 25 भाग हैं। परीक्षा के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण भागों की सूची नीचे दी गई है:
  • भाग I (अनुच्छेद 1–4): संघ और उसका राज्य क्षेत्र (The Union and its Territory)
  • भाग II (अनुच्छेद 5–11): नागरिकता (Citizenship)
  • भाग III (अनुच्छेद 12–35): मौलिक अधिकार (Fundamental Rights)
  • भाग IV (अनुच्छेद 36–51): राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSP)
  • भाग IV-A (अनुच्छेद 51-A): मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) - 42वें संशोधन 1976 द्वारा जोड़ा गया।
  • भाग V (अनुच्छेद 52–151): संघ सरकार (The Union Government) - कार्यपालिका, संसद, राष्ट्रपति की शक्तियां, कैग (CAG)
  • भाग VI (अनुच्छेद 152–237): राज्य सरकारें (The State Governments) - राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानमंडल, हाई कोर्ट
  • भाग IX (अनुच्छेद 243–243-O): पंचायतें (The Panchayats) - 73वें संशोधन 1992 द्वारा जोड़ा गया।
  • भाग IX-A (अनुच्छेद 243-P–243-ZG): नगरपालिकाएं (The Municipalities) - 74वें संशोधन 1992 द्वारा जोड़ा गया।
  • भाग XI (अनुच्छेद 245–263): संघ और राज्यों के बीच संबंध (Relations between the Union and the States)
  • भाग XV (अनुच्छेद 324–329-A): निर्वाचन / चुनाव (Elections)
  • भाग XVII (अनुच्छेद 343–351): राजभाषा (Official Language)
  • भाग XVIII (अनुच्छेद 352–360): आपातकालीन उपबंध (Emergency Provisions)
  • भाग XX (अनुच्छेद 368): संविधान का संशोधन (Amendment of the Constitution)

भाग-I: संघ और उसका राज्य क्षेत्र (अनुच्छेद 1 से 4)
यह भाग भारत की भौगोलिक सीमा और नए राज्यों के निर्माण से संबंधित है। प्रीलिम्स में इसके अनुच्छेदों से सीधे सवाल बनते हैं:
1. अनुच्छेद 1: संघ का नाम और राज्य क्षेत्र
  • संविधान के अनुसार: "इंडिया, यानी भारत, राज्यों का एक संघ (Union of States) होगा।"
  • महत्वपूर्ण तथ्य: यहाँ 'Union of States' शब्द का प्रयोग किया गया है, 'Federation' का नहीं। इसका मतलब है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है (जैसे अमेरिका में है), और किसी भी राज्य को भारत से अलग होने का अधिकार नहीं है।
  • डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के शब्दों में—"भारत एक अविनाशी संघ है जिसके राज्य विनाशी हैं (Indestructible Union of Destructible States)."
2. अनुच्छेद 2: नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
  • संसद को यह शक्ति दी गई है कि वह कानून बनाकर ऐसे नए राज्यों को भारतीय संघ में शामिल कर सकती है जो वर्तमान में भारत का हिस्सा नहीं हैं (जैसे 1975 में सिक्किम का भारत में विलय)।
3. अनुच्छेद 3: नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन
  • संसद साधारण बहुमत से किसी राज्य में से उसका क्षेत्र अलग करके, या दो या अधिक राज्यों को मिलाकर नया राज्य बना सकती है।
  • संसद किसी भी राज्य की सीमा बदल सकती है और उसका नाम बदल सकती है।
  • प्रक्रिया: ऐसा कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर ही संसद में पेश किया जा सकता है। राष्ट्रपति उस विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास विचार के लिए भेजते हैं, लेकिन संसद राज्य विधानमंडल के सुझावों को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
4. अनुच्छेद 4: अनुच्छेद 2 और 3 के तहत बनाए गए कानून
  • इसमें कहा गया है कि नए राज्यों का गठन या सीमाओं में परिवर्तन (अनुच्छेद 2 और 3 के तहत) को अनुच्छेद 368 के तहत 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा।
  • अर्थात, यह कार्य संसद द्वारा साधारण बहुमत (Simple Majority) से किया जा सकता है।

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