संसद के सत्र, उपकरण और विधायी प्रक्रिया: UPSC GS Paper 2 Notes

 भारतीय राजव्यवस्था (GS Paper-II): संसद के सत्र और विधायी प्रक्रिया

1. संसद के सत्र (Sessions of Parliament)
संविधान के अनुच्छेद 85 के तहत संसद के सत्रों का प्रावधान है:
  • सत्र आहूत करना (Summoning): संसद का सत्र बुलाने की शक्ति राष्ट्रपति के पास है।
  • अनिवार्यता: संसद के दो सत्रों के बीच 6 महीने से अधिक का अंतर नहीं होना चाहिए। अर्थात, संसद को वर्ष में कम से कम दो बार मिलना अनिवार्य है।
  • भारत में सामान्यतः तीन सत्र होते हैं:
    1. बजट सत्र (Budget Session): फरवरी से मई (सबसे लंबा सत्र)।
    2. मानसून सत्र (Monsoon Session): जुलाई से सितंबर।
    3. शीतकालीन सत्र (Winter Session): नवंबर से दिसंबर (सबसे छोटा सत्र)।
 स्थगन बनाम सत्रावसान (Adjournment vs Prorogation)
  • स्थगन (Adjournment): यह सदन की बैठक को कुछ घंटों, दिनों या हफ्तों के लिए रोकता है। यह शक्ति सदन के पीठासीन अधिकारी (अध्यक्ष/सभापति) के पास होती है। इससे कोई विधेयक समाप्त नहीं होता।
  • सत्रावसान (Prorogation): यह न केवल बैठक को बल्कि संसद के पूरे सत्र को समाप्त करता है। यह शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास होती है।

2. संसदीय कार्यवाही के उपकरण (Devices of Parliamentary Proceedings)
 प्रश्नकाल (Question Hour)
  • संसद की बैठक का पहला घंटा (11:00 AM से 12:00 PM) प्रश्नकाल के लिए होता है। इसमें सांसद मंत्रियों से सवाल पूछते हैं। ये प्रश्न तीन प्रकार के होते हैं:
    1. तारांकित प्रश्न (Starred Questions): इनका उत्तर मंत्री को मौखिक (Oral) देना होता है। इसके बाद पूरक प्रश्न (Supplementary Questions) पूछे जा सकते हैं।
    2. अतारांकित प्रश्न (Unstarred Questions): इनका उत्तर लिखित (Written) दिया जाता है। इसमें पूरक प्रश्न नहीं पूछे जा सकते।
    3. अल्प सूचना प्रश्न (Short Notice Questions): ये लोक महत्व के जरूरी मामले पर 10 दिन से कम का नोटिस देकर पूछे जाते हैं। इनका उत्तर भी मौखिक होता है।
 शून्यकाल (Zero Hour)
  • भारतीय नवाचार: शून्यकाल भारतीय संसदीय व्यवस्था की देन है, जो 1962 से जारी है। इसका संविधान या नियमों में कोई उल्लेख नहीं है।
  • समय: यह प्रश्नकाल के ठीक बाद (दोपहर 12:00 PM से 1:00 PM तक) शुरू होता है।
  • विशेषता: इसमें सांसद बिना किसी पूर्व सूचना के लोक महत्व के महत्वपूर्ण मुद्दे उठा सकते हैं।
 महत्वपूर्ण संसदीय प्रस्ताव (Motions)
  • अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion): यह केवल लोकसभा में लाया जा सकता है। इसे लाने के लिए कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन जरूरी है। यदि यह पास हो जाए, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।
  • निंदा प्रस्ताव (Censure Motion): यह किसी एक मंत्री या पूरे मंत्रिपरिषद के खिलाफ उनकी विशिष्ट नीतियों की निंदा के लिए लाया जाता है। इसके पास होने पर सरकार को इस्तीफा नहीं देना पड़ता।
  • ध्यानाकर्षण प्रस्ताव (Calling Attention Motion): किसी जरूरी लोक महत्व के मामले पर मंत्री का ध्यान आकर्षित करने के लिए लाया जाता है।

 3. विधायी प्रक्रिया: विधेयक कैसे कानून बनता है? (Legislative Procedure)
संविधान में विधेयकों को पारित करने के लिए विस्तृत प्रक्रिया दी गई है। विधेयक मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं:
① साधारण विधेयक (Ordinary Bill - अनुच्छेद 107, 108)
  • यह संसद के किसी भी सदन (लोकसभा या राज्यसभा) में पेश किया जा सकता है।
  • इसे दोनों सदनों द्वारा साधारण बहुमत से पारित होना जरूरी है।
  • गतिरोध और संयुक्त बैठक (Joint Sitting - अनुच्छेद 108): यदि किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों में मतभेद हो जाए, तो राष्ट्रपति संसद की संयुक्त बैठक बुला सकते हैं। इसकी अध्यक्षता हमेशा लोकसभा अध्यक्ष करता है और फैसला बहुमत से होता है (चूंकि लोकसभा की सदस्य संख्या अधिक है, इसलिए इसमें हमेशा लोकसभा का पलड़ा भारी रहता है)।
② धन विधेयक (Money Bill - अनुच्छेद 110)
  • परिभाषा: कर लगाने, सरकारी खर्चों या कर्ज लेने जैसे वित्तीय मामलों से जुड़े विधेयक।
  • विशेष नियम (Strictly Verified Facts):
    • यह केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है, राज्यसभा में नहीं।
    • इसे केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश पर ही पेश किया जा सकता है।
    • राज्यसभा की सीमित शक्तियां: राज्यसभा धन विधेयक को खारिज या संशोधित नहीं कर सकती। वह इसे अधिकतम 14 दिनों तक रोक सकती है। यदि 14 दिनों में वापस नहीं किया, तो इसे दोनों सदनों द्वारा पारित मान लिया जाता है।
    • धन विधेयक पर संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं होता।
③ वित्त विधेयक (Financial Bills - अनुच्छेद 117)
  • ये भी राजस्व या व्यय से संबंधित होते हैं। सभी धन विधेयक वित्त विधेयक होते हैं, लेकिन सभी वित्त विधेयक धन विधेयक नहीं होते। इनके पारित होने की प्रक्रिया कुछ शर्तों के साथ साधारण विधेयक जैसी ही होती है।
④ संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill - अनुच्छेद 368)
  • इसे संसद के किसी भी सदन में पेश किया जा सकता है, लेकिन इसे दोनों सदनों द्वारा अलग-अलग विशेष बहुमत (2/3 बहुमत) से पारित होना अनिवार्य है।
  • इस पर भी संयुक्त बैठक का कोई प्रावधान नहीं होता। राष्ट्रपति इस विधेयक को रोकने या पुनर्विचार के लिए वापस नहीं भेज सकते, उन्हें इस पर सहमति देनी ही पड़ती है (24वां संशोधन, 1971)।

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