संसद में बजट और संसदीय समितियां: UPSC GS Paper 2 Notes

भारतीय राजव्यवस्था (GS Paper-II): संसद में बजट और संसदीय समितियां

1. संसद में बजट प्रक्रिया (Budget in Parliament)
  • संवैधानिक प्रावधान: भारतीय संविधान में 'बजट' (Budget) शब्द का उल्लेख नहीं है। इसके स्थान पर अनुच्छेद 112 के तहत "वार्षिक वित्तीय विवरण" (Annual Financial Statement) शब्द का प्रयोग किया गया है।
  • प्रस्तुतीकरण: राष्ट्रपति की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री प्रतिवर्ष बजट को संसद के सामने पेश करते हैं।
बजट पारित होने के 6 मुख्य चरण (Stages in Enactment)
बजट संसद में निम्नलिखित छह चरणों से गुजरने के बाद ही प्रभावी होता है:
  1. बजट का प्रस्तुतीकरण (Presentation of Budget): वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में बजट भाषण पढ़ा जाता है और बजट पेश किया जाता है।
  2. आम बहस (General Discussion): बजट पेश होने के कुछ दिनों बाद दोनों सदनों में बजट के सिद्धांतों पर सामान्य चर्चा होती है।
  3. विभागीय समितियों द्वारा जांच (Scrutiny by Departmental Committees): आम बहस के बाद सदन कुछ हफ्तों के लिए स्थगित हो जाता है और 24 स्थायी विभागीय समितियां विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों की विस्तार से जांच करती हैं।
  4. अनुदान की मांगों पर मतदान (Voting on Demands for Grants): यह चरण केवल लोकसभा में होता है (राज्यसभा को मांगों पर मतदान का अधिकार नहीं है)। इस दौरान सांसद कटौती प्रस्ताव (Cut Motions) ला सकते हैं:
    • नीति कटौती (Policy Cut): मांग की राशि को घटाकर 1 रुपया करना।
    • आर्थिक कटौती (Economy Cut): मांग की राशि में से एक निश्चित कमी करना।
    • सांकेतिक कटौती (Token Cut): मांग की राशि में से 100 रुपये कम करना।
  5. विनियोग विधेयक पारित करना (Passing of Appropriation Bill - अनुच्छेद 114): भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से पैसा निकालने के लिए इस विधेयक का पास होना अनिवार्य है। इसके बिना सरकार एक रुपया भी खर्च नहीं कर सकती।
  6. वित्त विधेयक पारित करना (Passing of Finance Bill): सरकार के टैक्स (कर) संबंधी प्रस्तावों को लागू करने के लिए इसे पारित किया जाता है।

2. महत्वपूर्ण संसदीय समितियां (Parliamentary Committees)
संसद का काम बहुत अधिक और जटिल होता है, इसलिए वह अपने कार्यों के कुशल संपादन के लिए विभिन्न समितियों की मदद लेती है। इनमें तीन वित्तीय समितियां सबसे महत्वपूर्ण हैं:
① लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee - PAC)
  • सदस्य संख्या: इसमें कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से)।
  • चुनाव: इसके सदस्यों का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा प्रतिवर्ष होता है। कोई भी मंत्री इस समिति का सदस्य नहीं बन सकता।
  • अध्यक्ष: परंपरा के अनुसार, इस समिति का अध्यक्ष विपक्ष का कोई सदस्य होता है।
  • कार्य: यह समिति भारत सरकार के खर्चों से संबंधित कैग (CAG - नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) की रिपोर्ट की जांच करती है। यह देखती है कि पैसा सही जगह और मितव्ययिता से खर्च हुआ है या नहीं।
② प्राकलन समिति / आकलन समिति (Estimates Committee)
  • सदस्य संख्या (Strictly Verified Fact): यह संसद की सबसे बड़ी समिति है। इसमें कुल 30 सदस्य होते हैं।
  • विशेषता: इसके सभी 30 सदस्य केवल लोकसभा से होते हैं (इसमें राज्यसभा का कोई प्रतिनिधित्व नहीं होता)। कोई भी मंत्री इसका सदस्य नहीं बन सकता।
  • कार्य: यह बजट में शामिल अनुमानों (Estimates) की जांच करती है और सरकारी खर्चों में मितव्ययिता व प्रशासनिक सुधारों के लिए सुझाव देती है। इसे 'सतत किफायती समिति' भी कहा जाता है।
③ सार्वजनिक उपक्रमों संबंधी समिति (Committee on Public Undertakings)
  • सदस्य संख्या: इसमें कुल 22 सदस्य होते हैं (15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से)।
  • कार्य: यह सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों (जैसे- LIC, ONGC, SAIL) के खातों और उनकी कार्यकुशलता की जांच करती है।

महत्वपूर्ण वित्तीय कोष (Constitutional Funds)
  • भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India - अनुच्छेद 266): सरकार को मिलने वाला पूरा राजस्व (Tax) और ऋण इसी में जमा होता है। इससे पैसा निकालने के लिए संसद की मंजूरी (विनियोग विधेयक) अनिवार्य है।
  • भारत की आकस्मिकता निधि (Contingency Fund of India - अनुच्छेद 267): यह कोष अचानक आने वाले खर्चों (जैसे आपदा) के लिए राष्ट्रपति के नियंत्रण में होता है। इससे पैसा निकालने के लिए संसद की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन बाद में संसद से स्वीकृति लेनी पड़ती है।

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