भारत का उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट): गठन और क्षेत्राधिकार | UPSC Notes

भारतीय राजव्यवस्था (GS Paper-II): भारत का उच्चतम न्यायालय (Supreme Court of India)

परिचय (Introduction)
  • एकीकृत न्यायपालिका: भारत में एकल और एकीकृत न्यायपालिका (Integrated Judiciary) व्यवस्था है, जिसका अर्थ है कि शीर्ष पर उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) है, उसके नीचे उच्च न्यायालय (हाई कोर्ट) और सबसे नीचे अधीनस्थ न्यायालय (जिला अदालतें) हैं।
  • संविधान का भाग व अनुच्छेद: संविधान के भाग V के तहत अनुच्छेद 124 से 147 तक सुप्रीम कोर्ट के गठन, स्वतंत्रता, अधिकार क्षेत्र और शक्तियों का उल्लेख है।
  • मूल संरचना: 28 जनवरी 1950 को भारत के उच्चतम न्यायालय का उद्घाटन हुआ था।

गठन और न्यायाधीशों की नियुक्ति (Composition & Appointment)
  • जजों की संख्या: वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) सहित कुल 34 न्यायाधीश (33 + 1) हैं। संसद को कानून बनाकर जजों की संख्या बढ़ाने का अधिकार है।
  • नियुक्ति (Appointment): सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
कॉलेजियम व्यवस्था (Collegium System - Strictly Verified Fact)
  • सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति और ट्रांसफर के लिए कॉलेजियम व्यवस्था काम करती है।
  • यह कोई संवैधानिक संस्था नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (Three Judges Cases) से विकसित हुई है।
  • इसमें सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और 4 सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश शामिल होते हैं। यह समिति जिन नामों की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजती है, राष्ट्रपति उन्हीं को जज नियुक्त करते हैं।
योग्यताएँ (Qualifications - अनुच्छेद 124(3))
सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए व्यक्ति को:
  1. भारत का नागरिक होना चाहिए।
  2. वह किसी हाई कोर्ट (या एक से अधिक हाई कोर्ट) में कम से कम 5 वर्ष तक न्यायाधीश रहा हो, या
  3. वह किसी हाई कोर्ट में कम से कम 10 वर्ष तक अधिवक्ता (वकालत) रहा हो, या
  4. वह राष्ट्रपति के मत में एक प्रतिष्ठित न्यायविद (Distinguished Jurist) हो।
  • नोट: संविधान में सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए कोई न्यूनतम आयु सीमा तय नहीं की गई है।
कार्यकाल और पद से हटाना (Tenure & Removal)
  • कार्यकाल: वह 65 वर्ष की आयु तक अपने पद पर रह सकता है।
  • हटाने की प्रक्रिया (अनुच्छेद 124(4)): जज को केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही पद से हटाया जा सकता है। इसके लिए संसद में एक विशेष प्रक्रिया (महाभियोग जैसी) अपनाई जाती है:
    • आधार: केवल दो आधारों पर हटाया जा सकता है— 'साबित कदाचार' (Proved Misbehaviour) या 'अक्षमता' (Incapacity)।
    • संसद के दोनों सदनों में अलग-अलग विशेष बहुमत (कुल सदस्यता का बहुमत और उपस्थित व मतदान करने वालों का 2/3 बहुमत) से प्रस्ताव पास होना अनिवार्य है। भारत के इतिहास में अब तक सुप्रीम कोर्ट के किसी भी जज को इस प्रक्रिया द्वारा हटाया नहीं गया है।

सुप्रीम कोर्ट का क्षेत्राधिकार और शक्तियाँ (Jurisdiction)
सुप्रीम कोर्ट के पास दुनिया के किसी भी अन्य सर्वोच्च न्यायालय से अधिक व्यापक शक्तियां हैं। इसके क्षेत्राधिकार को निम्नलिखित भागों में बांटा गया है:
1. मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction - अनुच्छेद 131)
इसका मतलब है कि कुछ मामलों की सुनवाई सीधे केवल सुप्रीम कोर्ट में ही हो सकती है, किसी अन्य अदालत में नहीं। जैसे:
  • केंद्र सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच का विवाद।
  • एक तरफ केंद्र और कुछ राज्य हों, और दूसरी तरफ अन्य राज्य हों।
  • दो या दो से अधिक राज्यों के बीच का आपसी विवाद।
2. रिट क्षेत्राधिकार (Writ Jurisdiction - अनुच्छेद 32)
  • नागरिकों के मौलिक अधिकारों (Fundamental Rights) के उल्लंघन होने पर सुप्रीम कोर्ट 5 प्रकार की रिट (बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार पृच्छा) जारी कर सकता है।
  • ध्यान रहे: सुप्रीम कोर्ट का रिट क्षेत्राधिकार केवल मौलिक अधिकारों के लिए है, जबकि हाई कोर्ट (अनुच्छेद 226) अन्य कानूनी अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है (इस मामले में हाई कोर्ट का दायरा बड़ा है)।
3. अपीलीय क्षेत्राधिकार (Appellate Jurisdiction - अनुच्छेद 132-134)
  • सुप्रीम कोर्ट देश की सर्वोच्च अपीलीय अदालत है। यह निचले न्यायालयों (हाई कोर्ट) के फैसलों के खिलाफ अपील सुनता है। इसमें संवैधानिक मामले, दीवानी (Civil) मामले और आपराधिक (Criminal) मामले शामिल हैं।
4. सलाहकारी क्षेत्राधिकार (Advisory Jurisdiction - अनुच्छेद 143)
  • राष्ट्रपति किसी भी सार्वजनिक महत्व के कानूनी तथ्य या मामले पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांग सकते हैं।
  • नियम: सुप्रीम कोर्ट सलाह देने के लिए बाध्य नहीं है, और न ही राष्ट्रपति उस सलाह को मानने के लिए बाध्य हैं।
5. अभिलेख न्यायालय (Court of Record - अनुच्छेद 129)
  • सुप्रीम कोर्ट के सभी फैसले, कार्यवाही और निर्णय कानूनी साक्ष्य (Evidence) के रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं। निचले न्यायालयों में इन्हें नजीर (उदाहरण) के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।
  • इसके पास अपनी अवमानना (Contempt of Court) के लिए दंड देने की शक्ति भी शामिल है।

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