राजस्थान में 1857 की क्रांति के क्या कारण रहे थे


राजस्थान में 1857 की क्रांति के क्या कारण रहे थे


राजस्थान में 1857 की क्रांति के क्या कारण रहे थे




भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 की क्रांति में राजस्थान की भूमिका अति महत्वपूर्ण रही थी। 28 मई 1857 को नसीराबाद छावनी से शुरू हुई यह क्रांति पूरे राजपूताना में आग की तरह फैल गई।


लेकिन इस महासंग्राम की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे वर्षों से पनप रहा जन-आक्रोश और ब्रिटिश नीतियां थीं। आइए विस्तार से जानते हैं कि राजस्थान में 1857 की क्रांति के मुख्य कारण क्या थे।


राजस्थान में 1857 की क्रांति के प्रमुख कारण (Causes of 1857 Revolt in Rajasthan)


1. संधियों का उल्लंघन और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप

1817-1818 ईस्वी में राजस्थान की रियासतों ने अंग्रेजों (ईस्ट इंडिया कंपनी) के साथ संधियां की थीं। इन संधियों के तहत अंग्रेजों ने वादा किया था कि वे राजाओं के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे। 


लेकिन धीरे-धीरे अंग्रेजों ने राजाओं की संप्रभुता पर चोट करना शुरू कर दिया। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 1821 ई. का मांगरोल का युद्ध था, जहाँ अंग्रेजों ने कोटा महाराव किशोर सिंह के विरुद्ध जाकर उनके दीवान जालिम सिंह की सैन्य सहायता की थी।


उन्होंने जोधपुर, भरतपुर, अलवर के उत्तराधिकार विवादों में सीधा हस्तक्षेप किया, जिससे स्थानीय शासकों और जनता में भारी असंतोष फैल गया।


2. राज्यों में उत्तराधिकार के प्रश्न पर असंतोष


अंग्रेजों ने राजाओं के पारंपरिक गोद लेने और उत्तराधिकार के नियमों में खुलकर हस्तक्षेप किया। उन्होंने 1826 ई. में अलवर राज्य के आंतरिक मामलों में दखल देकर राज्य के दो हिस्से करवा दिए। इसी तरह 1826 ई. में ही भरतपुर के उत्तराधिकार के विवाद में हस्तक्षेप करते हुए अंग्रेजों ने लोहागढ़ दुर्ग को घेरकर नष्ट कर दिया। इन घटनाओं से राजाओं और आम जनता में ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ गहरा असंतोष फैल गया।

3. सामंतों और जागीरदारों का दमन


राजस्थान की पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था में सामंतों (जागीरदारों) का बहुत सम्मान और प्रभाव था। अंग्रेजों ने अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए सामंतों की सैन्य शक्ति को भंग कर दिया और उनके अदालती अधिकारों को छीन लिया। जागीरदारी प्रथा पर चोट के कारण आउवा के ठाकुर कुशाल सिंह जैसे शक्तिशाली सामंत अंग्रेजों के कट्टर दुश्मन बन गए।


3. आर्थिक शोषण और खिराज (Tax) का बोझ


अंग्रेजों ने सुरक्षा के बदले राजपूत राजाओं पर भारी 'खिराज' (वार्षिक कर) लगा दिया। इसके अलावा, राज्यों में शांति व्यवस्था के नाम पर ब्रिटिश सेनाएं (जैसे- जोधपुर लीजियन, मेवाड़ भील कोर, शेखावाटी ब्रिगेड) गठित की गईं, जिनका पूरा खर्च भी राजाओं से ही वसूला जाता था। इस आर्थिक बोझ को उठाने के लिए राजाओं ने जनता पर टैक्स बढ़ा दिए, जिससे किसान, व्यापारी और आम लोग कंगाल होने लगे।


4. सामाजिक और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप


अंग्रेजों द्वारा भारत में किए जा रहे सामाजिक सुधारों (जैसे- सती प्रथा उन्मूलन, कन्या वध पर रोक) को राजस्थान की रूढ़िवादी जनता ने अपनी संस्कृति पर हमला माना। साथ ही, ईसाई मिशनरियों द्वारा जेलों और स्थानीय स्तर पर धर्म परिवर्तन के प्रयासों ने लोगों के मन में यह डर पैदा कर दिया कि अंग्रेज उनका धर्म नष्ट करना चाहते हैं।


5. सैनिकों के साथ नस्लीय भेदभाव


अंग्रेजी सेना में काम करने वाले राजपूताना के भारतीय सैनिकों के साथ नस्लीय दुर्व्यवहार किया जाता था। उन्हें अंग्रेज सैनिकों की तुलना में बहुत कम वेतन मिलता था और उच्च पदों पर पदोन्नति (Promotion) के रास्ते उनके लिए बंद थे। इससे सैनिकों के स्वाभिमान को ठेस पहुंच रही थी।


6. तात्कालिक कारण: चर्बी वाले कारतूस


इस बारूद के ढेर में चिंगारी लगाने का काम 'एनफील्ड राइफल' के नए कारतूसों ने किया। इन कारतूसों के कवर को दांतों से काटना पड़ता था और सैनिकों के बीच यह बात फैल गई कि इनमें गाय और सूअर की चर्बी का इस्तेमाल किया गया है। इसने हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों के सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को भड़का दिया।


संक्षेप में कहें तो, हम इस प्रकार कह सकते हैं कि अंग्रेजों की दमनकारी आर्थिक नीतियां, राजाओं और सामंतों की शक्तियों को कुचलना और धार्मिक हस्तक्षेप ही राजस्थान में 1857 की क्रांति के मुख्य स्तंभ बने। भले ही यह क्रांति पूरी तरह सफल नहीं हो सकी, लेकिन इसने राजस्थान की जनता में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का बीज बो दिया।


पूरी पोस्ट पढ़ें - राजस्थान में 1857 की क्रांति Complete Notes

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